देवरिया : शेल्टर होम यौनशोषण मामले में सरकार ने जिलाधिकारी को हटाया , 3 अगस्त को सरकार ने दिए थे बाल गृह व् महिला संरक्षण गृह के निरिक्षण के आदेश

देवरिया : शेल्टर होम "माँ विंध्यवासिनी संरक्षण गृह" में चल रहे देह व्यापार के खुलासे के बाद उत्तरप्रदेश के शाशन प्रशाशन में हलचल मच गई है सरकार ने इस मामले में कार्यवाही करते हुए देवरिया के जिलाधिकारी को हटा दिया है मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उत्तरप्रदेश सरकार ने 03/08/2018 को आदेश जारी किया था जिसमे सभी जिलाधिकारियों को ये आदेश दिए गए थे की वो अपने क्षेत्र में चल रहे सभी बाल गृह तथा महिला संरक्षण ग्रहों का निरीक्षण करें तथा यहाँ की साफ सफाई व् रखरखाव का निरीक्षण करें तथा ध्यान रक्खे की किसी महिला या बच्चो को किसी तरह की परेशानी न हो इस आदेश पर अमल करने में किसी भी तरह की कोताही बरतने पर सम्बंधित जिलाधिकारी पर कड़ी कार्यवाही की चेतावनी भी दी गई थी
सरकार ने इसी आदेश की अवहेलना के चलते देवरिया के जिलाधिकारी को हटा दिया है
लेकिन क्या इस कृत्य के लिए सारा ठीकरा जिलाधिकारी पर फोड़ना जायज है
जिस शेल्टर होम में बच्चियां रह रही थी उस शेल्टर होम की मान्यता रद्द कर दी गई थी तथा शेल्टर होम को ये आदेश दिया गया था कि वो बच्चियो को प्रशाशन के हवाले कर दे लेकिन शेल्टर होम के मालिकों ने ऐसा नही किया और प्रतिबन्ध के बावजूद प्रशाशन की मिली भगत से शेल्टर होम धड़ल्ले से चलता रहा । लेकिन जब इस कांड का खुलासा हुआ तो आनन फानन में सरकार ने सारा ठीकरा जिलाधिकारी पर फोड़ दिया । इस मामले को लेकर राजनैतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है नेताओ के बयानबाजी का सिलसिला चल पड़ा है । लेकिन मुख्य मुद्दा ये है कि क्या इस तालाब की बड़ी मछलियों तक कानून के हाथ पहुँच पाएंगे या केवल राजनीती बयानबाजी ही चलती रहेगी ।

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